एक साल से कोर्ट के आदेश की उड़ रही धज्जियां, लेखपाल-कानूनगो पर मिलीभगत का आरोप , विधवा मां और बेटे भटक रहे तहसील
घाटगांव की जमीन का मामला, 19 मार्च 2025 को जारी हुई थी डिक्री , समाधान दिवस में शिकायत के बाद भी पैमाइश नहीं, SDM से तीसरी बार लगाई गुहार
शाही। तहसील मीरगंज में कोर्ट के आदेश की खुलेआम अवहेलना का मामला सामने आया है। शाही निवासी एक युवक और उसकी विधवा मां एक साल से अपनी जमीन की पैमाइश के लिए तहसील के चक्कर काट रहे हैं। आरोप है कि लेखपाल और कानूनगो विपक्षी से मिले हुए हैं और जानबूझकर कोर्ट की डिक्री के बावजूद पैमाइश टाल रहे हैं। परेशान होकर पीड़ित ने उपजिलाधिकारी मीरगंज को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है।
पीड़ित राघवेन्द्र कुमार पुत्र वियोन्तम सिंह निवासी शाही ने एस डी एम को दिए पत्र में बताया कि उनकी आराजी मौजा घाटगांव, परगना शाही में स्थित है , गाटा संख्या 835 में प्रार्थी व उसकी मां शकुन्तला देवी का आधा हिस्सा है , करीब पन्द्रह साल की न्यायिक प्रक्रिया के बाद न्यायालय के आदेश से कुर्राबंदी के बाद हिस्सा निर्धारित किया गया , 19 मार्च 2025 को कोर्ट की डिक्री भी जारी हो गई और कानूनगो व लेखपाल को आदेश अनुपालन के लिए दी गई ,
आरोप है कि विपक्षी खाताधारकों से मिलीभगत के चलते कानूनगो व लेखपाल पिछले एक साल से पैमाइश के लिए डेट लगाकर टाल रहे हैं , पूछने पर कोई कारण नहीं बताते।
परेशान होकर प्रार्थी ने 5 जून को सम्पूर्ण समाधान दिवस तथा 17 जून 2026 को SDM कार्यालय में प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन डेट देने के बाद भी पैमाइश नहीं हो सकी ।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि हल्का लेखपाल शेरगढ़ ब्लॉक का मूल निवासी है और उसी ब्लॉक में तैनात है , इससे वह पूरी तरह से मनमानी पर उतारू है,
पीड़ित राघवेन्द्र कुमार ने शनिवार को मीरगंज एस डी एम से निवेदन किया है कि उसकी व उसकी विधवा मां शकुन्तला देवी की आराजी की पैमाइश कराकर कब्जा दिलाया जाए और कोर्ट आदेश का अनुपालन कराया जाए,
कोर्ट का आदेश एक साल से लंबित है, समाधान दिवस में शिकायत के बाद भी कार्रवाई न होना तहसील प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। विधवा महिला को न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है।