सीतापुर में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कम्पोजिट विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को शुद्ध, पौष्टिक एवं स्वच्छ वातावरण में मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा एक सराहनीय पहल की गई है। जिलाधिकारी डा० राजागणपति आर० के निर्देशानुसार जनपद के समस्त 19 विकास खण्डों में मनरेगा एवं ग्राम निधि के माध्यम से कुल 800 मिड-डे-मील (एम०डी०एम०) शेड निर्मित कराए जाएंगे।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मिड-डे-मील शेडों के निर्माण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचलों के विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करना है। अब तक अनेक विद्यालयों में समुचित शेड न होने के कारण खुले स्थानों पर भोजन पकाया जाता था, जिससे धूल-मिट्टी, पत्तियों एवं अन्य बाहरी तत्वों के कारण भोजन की स्वच्छता प्रभावित होती थी। साथ ही कच्ची जमीन पर खाद्य सामग्री और बर्तन रखने की मजबूरी भी बनी रहती थी।
इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक विकास खण्ड में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार शेडों का निर्माण किया जाएगा। ऐलिया, बेहटा, बिसवां, गोंदलामऊ, हरगांव, कसमण्डा, खैराबाद, लहरपुर, मछरेहटा, महमूदाबाद, महोली, मिश्रिख, पहला, परसेण्डी, पिसावां, रामपुर मथुरा, रेउसा, सकरन एवं सिधौली—सभी विकास खण्डों में चरणबद्ध रूप से मिड-डे-मील शेड बनाए जाएंगे।
मिड-डे-मील शेडों के निर्माण से न केवल भोजन पकाने और परोसने की व्यवस्था सुव्यवस्थित होगी, बल्कि छात्र-छात्राओं को एक ही स्थान पर बैठकर सामूहिक रूप से भोजन करने का अवसर भी मिलेगा। इससे बच्चों में अनुशासन, समानता और सामाजिक समरसता की भावना विकसित होगी। साथ ही विद्यालय परिसर की स्वच्छता बनी रहेगी और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों में भी कमी आएगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि स्वच्छ वातावरण में शुद्ध भोजन बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। मिड-डे-मील शेड बन जाने से विद्यालयों का शैक्षिक वातावरण और अधिक सकारात्मक होगा तथा बच्चों की नियमित उपस्थिति को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
निस्संदेह, जनपद सीतापुर में मिड-डे-मील शेड निर्माण की यह पहल शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता—तीनों क्षेत्रों में एक साथ प्रभाव डालने वाला महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य में बच्चों के समग्र विकास में सहायक सिद्ध होगा।