सागर - सनातन हिंदू एकता रथयात्रा गढ़ा से चलकर पन्ना, हटा, दमोह, गढ़ाकोटा होते हुए रहली, ढाना, बम्होरी होते हुए सागर आरटीओ तिली चौराहे से श्री बालाजी परिसर पहुंची। भक्तों के लंबे इंतजार और आस्था को देखते हुए बागेश्वर धाम सरकार पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सुबह 4 बजे दिव्य दरबार लगाया, जिसमें लगभग 8 भक्तों की अर्जी स्वीकार की गई।
सागर के भक्तों के उल्लास और भक्ति भाव को देखकर बाबा जी ने कहा कि सागर के इतिहास में एक नई रात लिखी गई। यात्राएं तो कई हुईं, लेकिन यह 5 दिवसीय यात्रा जब से प्रारंभ हुई है लगातार चल रही है। सागर के पागल भक्तों का जुनून देखकर लगता है कि यह 15 दिनों की यात्रा होनी थी। ऐसी श्रद्धा भक्ति सागर वासियों में देखने को मिलती है।
बाबा जी ने कहा कि यह यात्रा जितनी मुंडी उतनी कुंडी यज्ञ के समान है। सागर वालों ने इतना प्रेम दिया कि वे चकित हो गए। कहा कि प्रेम पाना सरल है, लेकिन पचा पाना कठिन होता है।
उन्होंने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि राम नैतिक रथयात्रा है। भक्तों से कहा कि आज नहीं जागे तो फिर कभी नहीं सो पाओगे। आज हर घर में अज्ञानता का सांप छिपा बैठा है। अगर सनातन का घाटा होगा तो देश का भी बड़ा घाटा होगा। हम सभी हिंदुओं को एक होना होगा तभी सनातन संस्कृति की रक्षा हो सकेगी।
बाबा जी ने सनातन हिंदू एकता रथयात्रा के चार मूल मंत्र दिए -
1. जात-पात की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई
2. गौ माता को बचाना है, सभी को गौ रक्षक बनना है
3. लव जिहाद मुक्त सागर बनाना है
4. शराब मुक्त सागर बनाना है
दरबार के बाद बाबा ने श्री बालाजी महाराज को प्रणाम कर रथयात्रा पुनः सागर से टीकमगढ़ के लिए प्रारंभ की। कार्यक्रम का समापन क्षेत्रीय सांसद डॉ. लता वानखेड़े द्वारा ध्वजा वंदन एवं राष्ट्रगान से हुआ, जो सुंदरलाल श्रीवास्तव मेमोरियल स्कूल रजाखेड़ी मकरोनिया की छात्राओं द्वारा किया गया।