अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या
By Ajab, 08:20:46 PM | July 02
विष्णु_जाट_के_गरीब_माता_पिता!
भरतपुर। अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या के मुख्य आरोपी विष्णु उर्फ विष्णु अजान के गांव पहुंचकर की गई पड़ताल में एक ऐसे परिवार की तस्वीर सामने आई, जो बेटे के अपराधों से पूरी तरह टूट चुका है। पिता रामबाबू सिंह की आंखों में आंसू थे और जुबान पर सिर्फ एक ही बात- "काश जन्म लेते ही मर जाता तो सिर्फ दुख होता, लेकिन आज उसने पूरे परिवार को समाज में शर्मिंदा कर दिया। जो जैसा करेगा, वैसा भरेगा। अब उसके लिए न वकील करेंगे और न कभी जेल में मिलने जाएंगे।" डीग जिले के अजान गांव में रहने वाले विष्णु का घर इन दिनों सन्नाटे में डूबा है। गांव के लोग भी उसके नाम से दूरी बना रहे हैं। परिजनों का कहना है कि उन्होंने बचपन से लेकर जेल जाने तक हर स्तर पर उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वह अपराध की दुनिया से बाहर नहीं निकल सका। पिता रामबाबू सिंह बताते हैं कि विष्णु ने गांव के सरकारी स्कूल से तीसरी कक्षा तक पढ़ाई की। इसके बाद पढ़ाई में मन नहीं लगा और गलत संगत में पड़ गया। परिवार को शुरू में लगा कि उम्र के साथ समझ आ जाएगी, लेकिन धीरे-धीरे उसका झुकाव अपराध की ओर बढ़ता चला गया। रामबाबू कहते हैं, "घर का ऐसा कोई सदस्य नहीं था जिसने उसे नहीं समझाया हो। जब हमारी बात नहीं मानी तो गांव के सरपंच के पास ले गए। सरपंच ने भी समझाया, लेकिन उसके ऊपर किसी बात का असर नहीं हुआ। वह मजदूरी करने का कहकर भरतपुर जाता था, लेकिन वहां अपराधियों की संगत में पड़ गया।" रामबाबू बताते हैं कि करीब तीन साल पहले एक बार बेटे का संदेश आया कि वह जेल में बहुत परेशान है और अपराध छोड़ना चाहता है। इसके बाद वह उससे मिलने गए। उन्होंने बताया, "वह मेरे सामने रोया था। उसने कहा था कि अब कभी अपराध नहीं करूंगा। मुझे लगा था कि बेटा सुधर जाएगा, लेकिन जेल से बाहर आने के बाद उसने पहले से भी बड़ा अपराध कर दिया। अब उससे मिलने कभी नहीं जाऊंगा।" पिता ने साफ शब्दों में कहा कि "जो जैसा करेगा, वैसा भरेगा। उसने जो किया है, उसकी सजा उसे मिलनी चाहिए। हम उसके लिए कोई वकील नहीं करेंगे। अब उससे हमारा कोई संबंध नहीं है।" विष्णु की ताई रतन देवी ने भी कहा, "हमारे लिए तो वह मर चुका है। उसने पूरे परिवार को बदनाम कर दिया।" चचेरे भाई ने कहा कि परिवार ने उसे कई बार समझाया, लेकिन उसने कभी किसी की बात नहीं मानी। गांव के लोगों ने बताया कि विष्णु का परिवार बेहद गरीब है। पिता रामबाबू और ताऊ दयाराम राजमिस्त्री का काम करते हैं। दोनों भाई भी मजदूरी करके परिवार चलाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि परिवार के पास सिर्फ करीब एक बीघा जमीन है। आर्थिक हालत इतनी खराब है कि कई बार रोज कमाई होने पर ही घर का आटा खरीदा जाता है। उसी दिन रोटी बनती है। परिवार का अपराध की दुनिया से कभी कोई लेना-देना नहीं रहा। ग्रामीणों के अनुसार विष्णु ने शुरुआत छोटी-छोटी चोरियों से की थी। वह गांव के पोखर पर बंधे पशुओं की लोहे की जंजीरें खोलकर ले जाता और उन्हें कबाड़ में बेच देता था। उस पैसे से नशा करता था। इस बात को लेकर कई बार ग्रामीणों ने उसकी पिटाई भी की। गांव में बदनामी बढ़ने लगी तो उसने शहर का रुख किया और बाइक चोरी जैसी वारदातों में शामिल होने लगा। लगातार अपराधों में शामिल रहने के कारण वर्ष 2023 में उसे गिरफ्तार कर सेवर जेल भेजा गया। वहीं उसकी मुलाकात कृपाल जघीना गैंग के सदस्यों से हुई। जांच में सामने आया कि जेल से बाहर आने के बाद गैंग ने उसकी जमानत कराई। रहने, खाने और खर्च की जिम्मेदारी भी उठाई। धीरे-धीरे वह गैंग का सक्रिय सदस्य बन गया। कुलदीप जघीना हत्याकांड में भी पहली गोली बस के अंदर विष्णु ने ही चलाई थी। विष्णु ही जयपुर से बस में बैठकर पूरे रास्ते भर कुलदीप की पूरी जानकारी अन्य साथियों को दे रहा था। कुछ समय पहले अजान गांव में सरपंच पद के एक दावेदार को लेकर फोन पर जान से मारने की धमकी देने का मामला भी सामने आया था। इस प्रकरण में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की थी। इसके अलावा मई 2024 में अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल से मोबाइल फोन के जरिए कृपाल जघीना गैंग ने कुलदीप गैंग के बचे हुए सदस्यों को खत्म करने की साजिश रची थी। इस मामले में एटीएस ने जांच रिपोर्ट तैयार कर भरतपुर और अजमेर जेल प्रशासन को सौंपी थी। रिपोर्ट के आधार पर कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज हुआ और कई बदमाशों की गिरफ्तारी भी हुई। अब अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या के मामले में विष्णु मुख्य आरोपी है। इस घटना के बाद उसके गांव में सन्नाटा पसरा है। परिवार और ग्रामीण दोनों यही कहते हैं कि उन्होंने उसे अपराध के रास्ते से हटाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन वह नहीं बदला। आज परिवार बेटे के जिंदा होने के बावजूद उसे अपने लिए "मरा हुआ" मान चुका है।

