वाराणसी ।
बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में आज से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के चिकित्सा विज्ञान पर प्रभाव और इसके बढ़ते उपयोग पर केंद्रित एक विशेष लेक्चर सीरीज़ की शुरुआत हुई। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डा विनय पाठक भारतीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी संस्थान सोनीपत ने अपनी राय कृत्रिम बुद्धिमत्ता के चिकित्सा विज्ञान पर भावी प्रभाव पर चिकित्सा विशेषज्ञो के साथ राय रखी और चर्चा किया।
अपने प्रारंभिक व्याख्यान में डा. पाठक ने बताया कि आने वाले वर्षों में एआई चिकित्सा क्षेत्र को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि एआई की मदद से रोगों के निदान, सर्जरी की सटीकता, इमरजेंसी मैनेजमेंट, डेटा आधारित चिकित्सा निर्णय और अस्पताल प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
डा पाठक ने कहा कृत्रिम बुद्धिमत्ता कभी भी प्रकृति प्रदत्त बुद्धिमत्ता पर राज नहीं कर सकती सहयोग कर सकती सिर्फ।
डा. पाठक ने यह भी स्पष्ट किया कि एआई डॉक्टरों का विकल्प नहीं बल्कि सहयोगी तकनीक है, जिसका उद्देश्य चिकित्सकीय सेवाओं को अधिक प्रभावी, तेज़, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है। उन्होंने क्षेत्रानुसार एआई के विकास—जैसे ट्रॉमा, कार्डियक, न्यूरो और पीडियाट्रिक चिकित्सा—की आवश्यकता पर जोर दिया।
व्याख्यानमाला 21 तारीख तक प्रतिदिन जारी रहेगी, जिसमें डा. पाठक एआई के कारण चिकित्सा क्षेत्र में होने वाले परिवर्तनों, अनुसंधान में उभरती संभावनाओं और प्रयोगशालाओं में उपयोग होने वाले एआई संचालित उपकरणों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों, डॉक्टरों, शोधार्थियों और पैरामेडिकल कर्मियों को एआई की कार्यप्रणाली, नैतिक उपयोग और उसके व्यावहारिक लाभों से अवगत कराना है।