केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह जी द्वारा घोषित नई सहकारिता नीति गरीब, युवा, महिला, किसान और आदिवासी वर्गो के लिये वरदान सिद्ध होगी-पूर्व मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह
By Rishi Verma, 11:04:53 PM | July 26
सागर - नई सहकारिता नीति से देश का सहकारिता क्षेत्र तेजी से वृद्धि करेगा और भविष्य में कॉर्पोरेट सेक्टर के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा करने योग्य बनेगा। देश के गरीब, युवा, महिला, किसान और आदिवासी समुदाय को केन्द्र में रखकर बनाई गई नई सहकारिता नीति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘‘सबका साथ, सबका विकास‘‘ के मूल मंत्र पर आधारित है जो आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को पूरा करेगी। यह विचार मध्यप्रदेश के पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह ने केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा लोकार्पित की गई नई सहकारिता नीति-2025 पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए व्यक्त किये है।
पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि यह नीति इतनी व्यापक व दूरदर्शिता पूर्ण है जिससे देश की बहुत बड़ी जनसंख्या के जुड़ाव के साथ अर्थव्यवस्था को द्रुत गति देने के मास्टर प्लान की तरह देखा जा सकता है। इस नीति में देश की बेरोजगारी,गरीबी, पलायन जैसी समस्याओं का निवारण भी सन्निहित है। सहकारी नीति आने वाले 25 साल तक सहकारिता क्षेत्र को प्रासंगिक, योगदान देने वाला और भविष्य का क्षेत्र भी बनाएगी।
उन्होंने कहा कि इसके तहत अब किसान मंडी और बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहेंगे, सहकारी समितियां सीधे उपज खरीदेंगी। गांवों में डेयरी कलेक्शन, खाद-बीज वितरण और अनाज भंडारण की जिम्मेदारी सहकारी समितियों की होगी। युवा और महिलाएं नीति के केंद्र में हैं। सभी समितियां डिजिटल हो कर अपना कामकाज पारदर्शी और तेजी से करेंगी। गांव के युवाओं को सहकारी प्रबंधन की ऐसी ट्रेनिंग दी जाएगी जिससे वे समितियों को बेहतर ढंग से संचालित कर सकें।
पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक भूपेंद्र सिंह ने बताया कि हर तहसील में 5-5 मॉडल सहकारी गाँव विकसित करना राष्ट्रीय सहकारिता नीति का लक्ष्य है। सहकारिता नीति के केंद्र बिंदु गांव, कृषि, ग्रामीण महिलाएं, दलित और आदिवासी हैं। अब टूरिज्म, टैक्सी, इंश्योरेंस और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भी सहकारी समितियां बन पाएंगी। 2034 तक सहकारी क्षेत्र के जीडीपी में योगदान को तीन गुना बढ़ाना, 50 करोड़ सक्रिय सदस्य और युवाओं को रोजगार से जोड़ने का काम सहकारिता नीति से संभव होगा। 50 करोड़ नागरिक, जो वर्तमान में सहकारी क्षेत्र के सक्रिय सदस्य या सदस्य ही नहीं हैं, उन्हें सहकारी क्षेत्र का सक्रिय सदस्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान में 8 लाख 30 हजार सहकारी समितियाँ हैं जिनमें संख्या में 30 प्रतिशत की वृद्धि की जा रही है। प्रत्येक पंचायत में कम से कम एक प्राथमिक सहकारी इकाई होगी, जो प्राथमिक कृषि ऋण समिति प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (पैक्स), प्राथमिक डेयरी, प्राथमिक मत्स्य पालन समिति, प्राथमिक बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियां(पैक्स) या अन्य प्राथमिक इकाई हो सकती है। इनके माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जाएंगे। पारदर्शिता, वित्तीय स्थिरता, और संस्थागत विश्वास को बढ़ाने के लिए प्रत्येक प्राथमिक सहकारिता इकाई का सशक्तिकरण होगा। इसके लिए एक क्लस्टर और निगरानी तंत्र (मॉनिटरिंग सिस्टम) भी विकसित किया जाएगा। श्वेत क्रांति 2.0 के माध्यम से महिलाओं की सहभागिता को इससे जोड़ा जाएगा। अगले दो दशकों में तकनीक को हर छोटी से छोटी इकाई तक पहुँचाने और गाँवों के सामाजिक-आर्थिक ढांचे में बड़ा बदलाव लाने के लिए इस नीति में महत्वपूर्ण तत्व शामिल किए गए हैं। कम्प्यूटरीकरण के माध्यम से कार्यप्रणाली पूरी तरह बदल जाएगा जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और क्षमता वृद्धि होगी। सहकारी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा, वित्तीय स्थिरता, पारदर्शिता, और चुनौतियों का सामना करने की लचीलापन प्रदान करने के लिए एक निगरानी तंत्र के माध्यम से इन्हें जमीनी स्तर तक लागू किया जाएगा। साथ ही, हर 10 वर्ष में कानून में आवश्यक बदलाव करने की व्यवस्था भी की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह आंकड़े नई सहकारिता नीति की सफलता का आरंभ है जिनमें बताया गया है कि अब तक 45 हज़ार नई प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (पैक्स) बनाने का काम लगभग समाप्त हो चुका है। प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के कम्प्यूटरीकरण का काम भी हो चुका है और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के साथ जोड़े गए 25 नए काम में से हर काम में कुछ न कुछ प्रगति हुई है। यह जानकारी सहकारिता क्षेत्र के लिए बहतु उत्साहजनक है कि पीएम जनऔषधि केन्द्र के लिए अब तक 4108 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को स्वीकृति मिल चुकी है, 393 प्राथमिक कृषि ऋण समितियां(पैक्स) पेट्रोल और डीज़ल के रिटेल आउटलेट के लिए आवेदन कर चुकी हैं। एलपीजी वितरण के लिए 100 से अधिक प्राथमिक कृषि ऋण समितियां(पैक्स) आवेदन कर चुकी हैं और इसके साथ ही हर घर नल से जल का प्रबंधन और पीएम सूर्य घर योजना आदि के लिए भी प्राथमिक कृषि ऋण समितियां(पैक्स) काम कर रही हैं। इन सब कामों के लिए प्रशिक्षित मैनपावर के लिए त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी की नींव डालने का काम भी हो चुका है। एक्सपोर्ट, बीज और ऑर्गेनिक उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए तीन बहुराज्यीय सहकारी समिति बनाई जा चुकी हैं।

