हरदोई। मक्का की कटाई के बाद खेतों में बचे फसल अवशेषों के निस्तारण की समस्या से किसानों को राहत दिलाने के लिए बिलग्राम प्रगतिशील एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने विशेष पराली प्रबंधन अभियान चलाया। अभियान के अंतर्गत लगभग 900 किसानों के 950 एकड़ क्षेत्रफल से मक्का के फसल अवशेषों को बिना किसी शुल्क के हटाया गया।
एफपीओ द्वारा राउंड बेलर मशीन की सहायता से खेतों में बिखरे फसल अवशेषों को एकत्रित कर उनके बंडल बनाए गए। अभियान के दौरान करीब 600 टन मक्का अवशेष के बंडल तैयार किए गए। इन बंडलों की बिक्री लगभग ₹1,800 प्रति टन की दर से की गई, जिससे कुल ₹10.80 लाख का कारोबार हुआ।
इस पहल से किसानों को समय पर खेत खाली करने और अगली फसल की बुवाई करने में सुविधा मिली। साथ ही खेतों में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने, वायु प्रदूषण कम करने और मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीवों एवं उसकी उर्वरता को सुरक्षित रखने में भी मदद मिली।
यह एफपीओ नाबार्ड द्वारा प्रमोटेड है तथा इसके लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक—नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक आदित्य शर्मा और सीबीबीओ संस्था नेशनल एग्रो फाउंडेशन के प्रतिनिधि ज्ञानेंद्र सिंह का अहम सहयोग रहा। अभियान की योजना बनाने, किसानों को जागरूक करने, मशीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और फसल अवशेषों के विपणन में दोनों संस्थाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।
एफपीओ के निदेशक सोमेश प्रताप सिंह ने बताया कि पराली जलाने के बजाय उसका उपयोग जैविक खाद, पशु चारा, मल्चिंग, बायोफ्यूल तथा अन्य कृषि एवं औद्योगिक कार्यों में किया जा सकता है। इससे किसानों को पराली निस्तारण की समस्या से राहत मिलने के साथ फसल अवशेषों का आर्थिक उपयोग भी संभव होता है।
एफपीओ ने किसानों से अपील की है कि वे फसल अवशेषों को जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से उनका प्रबंधन करें। आने वाले समय में इस अभियान का दायरा बढ़ाकर अधिक किसानों और कृषि क्षेत्र को जोड़ने की योजना है।