जहां जरूरत नहीं, वहीं विकास! रेतीपुरा की पुलिया बनी जनता के गले की हड्डी
बरेली के ब्लॉक मीरगंज के गांव रेतीपुरा मसला है कहते हैं कि विकास वहीं होना चाहिए, जहां उसकी सबसे ज्यादा जरूरत हो। लेकिन जब विकास का पैमाना जनता की सुविधा नहीं, बल्कि बजट खर्च करना बन जाए, तब नतीजा रेतीपुरा जैसी तस्वीर के रूप में सामने आता है।
मीरगंज ब्लॉक की ग्राम पंचायत बलेही के मजरा रेतीपुरा -बंसीपुर मार्ग के बीच में रेतीपुरा से पूर्व दिशा में बनाई गई पुलिया इन दिनों ग्रामीणों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि मुसीबत का दूसरा नाम बन चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां पुलिया की कोई विशेष आवश्यकता ही नहीं थी, फिर भी इसे बनाकर उसके दोनों ओर कच्ची मिट्टी डाल दी गई, जिससे पहले से बनी पक्की सड़क का समतल बिगड़ गया।
बरसात आते ही हालात ऐसे हो गए हैं कि दोपहिया वाहन चालक रोज फिसलने का जोखिम उठा रहे हैं। चार पहिया वाहन बीच रास्ते में फंस जाते हैं और उन्हें ट्रैक्टर से खींचकर निकालना पड़ता है। जिस सड़क पर पहले लोग आराम से निकल जाते थे, अब वहीं से गुजरना किसी परीक्षा से कम नहीं रह गया है।
ग्रामीण तंज कसते हैं कि शायद यह "विकास" जनता की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि कागजों में उपलब्धि दिखाने के लिए हुआ है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब पुलिया की जरूरत ही नहीं थी, तो सरकारी धन आखिर किस सोच के तहत खर्च किया गया? अगर यही विकास है, तो फिर जनता को ऐसे विकास से बचाने के लिए भी कोई योजना बननी चाहिए।
अब ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि सड़क को तत्काल समतल कराया जाए और बरसात के मौसम में लोगों को हो रही परेशानी से राहत दिलाई जाए। आखिर विकास का मतलब रास्ता आसान करना होता है, जहां बरसात के बाद हुई दलदल से स्कूल जाने वाले टीचर और बच्चों को इस कीचड़ से गुजरना पड़ रहा है।